****तूफान ****

किसने देखा तूफान को उठते हुए, जो लेकर चला गया सबकुछ किसी का।
ज्वार भाटे सा आया और  ऊथल पुथल  कर गया राज़ ए दिल का।।

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*****हिसाब ****